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उफ्फ !कमवक्त दिन गुजरता है ....

उफ्फ !  कमवक्त दिन गुजरता है अब ,  सकून से तेरे बैगर । वरना कोशिश तो हमारी रहती है के ,  तू याद आती रहे । भूल हुई , चाहत जो बनी तू । दर्द अब, तब से बहुत है ।। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

अभी कल की ही तो बात है , मुलाकात हुए ।

अभी कल की ही तो बात है , मुलाकात हुए । फिर.... ना जाने क्यों होता है ? अहसास कुछ ऐसा के , जैसे मुद्दों से तुझे देखा नही । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

तुम पियो संग हमारे तो हम.....

तुम पियो संग हमारे तो हम , अपनी कसमें भी तोड़ देंगे । ये प्यार है मेरा जानम !  आजमाना नही । तुम कहो तो हम तेरे लिए , यह दुनिया भी छोड़ देंगे । ✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी

विरानों में है अब , बसर जिंदगी ।

विरानों में है अब , बसर जिंदगी । कहने को तो है बीच , सबके मगर । हर कोई गुम है , अपनी अपनी धुन में । किस को किसी की , क्या खबर । डूब चुका है सूरज न खबर , उगा कब । ऊंचे आसमान पर , इक टक टकी सी भरी नजर । न जाने , झुकेगी कब तलक । है इंतजार में , झरझर लिए काया "वृद्ध " कोई तो आए करीब , कुछ पल ही ...हां कुछ ही ,  पर बतियाए । हर पल मन में, यही बात धर । मगर किसको परवाह अब , उस माझी की जो डूब रहा हो सबको , किनारे पर उतार कर । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी