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रूठे हुए है आज न जाने क्यों वो ?

 रूठे हुए है आज न जाने क्यों वो ? जो मेरे आंखों में कभी , ख्वाब बनकर रहते थे ।  ख्वाब ही तो थे , कब किसके हुए । चलो अच्छा ही हुआ चले गए । अब नहीं है तसव्वुर में मेरे , उनका अक्स । बे फिक्र सा हुआ दिल अब , कुछ हल्का हल्का सा हुआ । अब दिल ने तोबा कर ली  लागी से ,  और कहे अब आगे नहीं, और अब  बस । ✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी 

मैं समय के साथ बदला हूं , या समय मेरे साथ ।

मैं समय के साथ बदला हूं , या समय मेरे साथ । जो भी हो पर अब , अंतर पहले से बहुत हो गया है । लाली गुम और , गाल गुठली आम हो गया है । उमर अभी खास नहीं मगर , लगते बुजुर्ग 60 पार हो गया है ।। मुंह में दांत नहीं और ,पेट में आंत नहीं । सब खाली-खाली सा मन का अब ये, मकाम हो गया है । जो भी हो पर अब , अंतर पहले बहुत हो गया है । हमसे कुछ ज्यादा ही रुष्ठ अब , शायद भगवान हो गया है । कांपते हाथ और , लड़खड़ाते कदम ,मानो भूकंप आया हो हल्का सा जैसे । भय से रक्त का रगों में , तीव्र संचार हो गया है । जो भी हो पर अब , अंतर पहले से बहुत हो गया है। सब खाली-खाली सा मन का अब ये, मकाम हो गया है । हमसे कुछ ज्यादा ही रुष्ठ अब , शायद भगवान हो गया है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी