काटी त खटाई दीदों , मिलाई त लोण । बचपन का दिन भूलों , बोड़ीक नि औण । काटी त खटाई दीदियों , मिलाई त लोण । बचपन का दिन भूलियों , लौटी क नि औण । माँ जी की खोकली , धरि त सिरवाण । बचपन की नींद स्य , अब नि औण । बचपन का दिन दीदो, लौटी क नि औण । काटी त खटाई भूलों , मिलाई त लोण । बचपन का दिन भूलियों, लौटिक नि औण । मांजी की पकाईं रस्वे , खाणे की रस्यांण । मॉं जी की पकाईं दीदियों, अब कखन खाण । दिन बचपन का भैजियों , समळोंणिया रै जाण । भाई बैणियों की माया दीदों , याद रै जाण । काटी त खटाई दिदों , मिलाई त लोण । बचपन का दिन भैजियो , बोड़ीक नि औण । बाबा जी की फटकार त , माँजी कु लाड । गैलियों की धौंस त , गैलाणियों की बात । दिनै की रूढ़ियों म तपणु , अर मयाली स्या रात । याद रै जाण भुलियों , ब्वे बाबू साथ । काटी त खटाई भुलों, मिलाई त लोण । बचपन का दिन भुलियों , लौटिक नि औण । दिनै थकान अर भूलों , रात झट सै जाण । आँखियों मुन्जी क फिर , अदनिन्द म खाण । माँ की मामता अर , बाबा कु लाड । मुंडाली फ्लोसी मांजी कु , काख मी सिवांळ । बचपन दिन सि...