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जून, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कहूं क्या इस दर्द ए हाल में ..

 कहूं क्या इस दर्द ए हाल में ,  अब अल्फाजों ने , जुबां से  रुखसत ले ली । आ करीब कुछ और हमारे ,  वक्त न जाने कब , हमें  खामोश कर दे ।। ठहर कुछ देर और ऐ जिंदगी ! कुछ देर और  उन्हें , मैं  गले से लगा तो लूं ।। जी भर के जी लूं , कुछ और अपने जी संग ।  इन शबनमी आंखों से मैं ,  कुछ देर और उन्हें , जी भर के देख तो लूं ।। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 

गुजर गए वो वक्त अब .....

 गुजर गए वो वक्त अब ,  अच्छा या बुरा जैसा भी रहा होगा । फिक्र तो अब आगे की है कि , वक्त अब आगे का कैसा होगा ? ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

यादों के झरोखोंसे आज...।

यादों के झरोखों से आज, तेरी याद चली आई है । ऐ मेरे बचपन तू , अब तो लौट आ । कई बहार आई और गुजर गई , इस रंगीन जमाने में । बे रंग सी जिंदगी है अब हमारी , सदियों की तन्हाई है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी