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जो कहते थे हम से कल मिलते है ...।

जो कहते थे हम से के , कल मिलते है । जमाना गुजर गया मगर...! उनका कल , आज तक आया नही । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

छुपाकर दर्द अपना...

छुपा कर दर्द अपना ,  मुश्किल से जी पा रहा हूं मैं । कहीं वो परेशान न हो जाए ,  जान कर मर्ज मेरा..! इसलिए , मुस्कुराए जा रहा हूं मैं ।। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

आज हर इजाम तेरा , ओ बेदर्द !

आज हर इलजाम तेरा , ओ बेदर्द !  हम अपने नाम किए जाते है । जा तूझे माफ किया , इलजाम तेरी बेवफाई का हम , अपने सर किए जाते है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

कभी घबराया तो , कभी शरमाया हूं मैं

कभी घबराया तो , कभी शरमाया हूं मैं । कभी चिलमन को हटाया तो , कभी खुद को उसमें  छुपाया हूं मैं । दिल में हुआ था कुछ कुछ , देख कर उन्हें  मेरे । शायद रहा हो वो "इश्क" जिसे जमाने से अब तक ,छुपाया हूं मैं । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी