हे.. हे.. हे...! आ...आ...आ ह....! हुं हूं ह उं.... पिडा बटोली क ल्यायों मी आज माया लै की , आयों बोडी जब मी उंका मुलूक छोडिक । ना रोकि उं म्यारू बाटु ना क्वी सौ ना कारार, ना बोली उं ना जवा मी छोडिक । रैयूं सासा... रैयों सासाा भिण्डि दूर तलक भी, मी थै धै लगालि वा । मुड़िक पछनै देखि त जनी , हाथ हल्कैकि , मी खुणि बुलोणी छ वा । दौडी गै मी अंग्वाठि मा , जाण का उंका । जनी पोंछी पोंछी मी वख मा , ना जाणी कख गै वा । पिडा बटोलि क ल्यांयों मी.... सच्ची बोदौं भुळो मी तुम , माया नि लयान माया नि लयान । भरेन्दु नि घो मिलदू जु माया मु , देंदू जु कुई निर्मोहि । कै कि मयाली छ्यूं मा ऐकी, कै तै अपणु दिल न दियान । सैडी सैंडी रतियों मा..२ होड फरकि फरकी क , रात बिती जांदी रात बीति जांदी । न दिन कु चैन छ अब ये दिल मा , ना अब यूं आखियों मा नींद आंदी । पिडा बटोळी क ल्यायो मी.... अपणा आंसुं....आंसू मीन पेट उंद समै । खुद रोयों मी अर , जग मीन खूब हंसै । रूमनांदि माया म्यारि जिकुडी झुरआंदी, जिकुडी झुरांदि । तोडी माया जौन्न मीतै , किले आज , उंकी याद आंदी । किलै नि मिटदि होली ...