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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वक्त है वही , कमी सिर्फ आपकी...

 वक्त है वही , कमी सिर्फ आपकी , वक्त कब रुका है , कट ही जाएगा । लेकिन वो अब पहली सी बात कहां । ***** तुझे  कुछ तो होगी मोहब्बत ,  कभी तो हम तुम्हें याद आएंगे । जज़्ब कर लेना तब , आंसुओ को अपनी पलकों पर । हम तुम्हें उन्हीं में , नजर आएंगे । ❤️❤️ ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

बहुत ही खूब सूरत है यह तोफा तेरा , प्यार है नाम जिसका ।

 बहुत ही खूब सूरत  है  यह तोफा तेरा ,  प्यार है नाम  जिसका । लगा के रखा हूँ सीने से , इसे मैं हर दम । न ख्याल है रुसवाई का , न डर जमाने का । *** हाल ए दिल क्या बयां करें हम ,  बस इतना समझ लो कि..... जी रहे है हम अब , तेरे इंतज़ार में । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

यूँ लगता है मुझे , मेरा वसंत फिर लौट आया है ।

 यूँ लगता है मुझे , मेरा वसंत फिर लौट आया है । आप आये , आप आये के बाहार आयी है । हूँ अकेला ही , हूँ अकेला ही मगर अहसास तेरा  ही है मुझ को , संग संग चलता जो मेरे , वो साया ही है तेरा । यूँ लगता है ..... गुनगुनाता हूँ जब भी कोई गीत ,(2) तुम ही ख्यालों में होते हो । रख सर अपना मेरे कांधों पर , और गुम सी किसी ख्यालों में । हाथ जब उठता है मेरा , सहलाने को । तेरे रेशमी बालों पर ,  कस लेती हो तुम मुझको,  फिर अपनी बाहों में । ये ख्वाब है, ये ख्वाब है  मुझ को इस ख्वाब में ही , जी लेने दो । पता क्या , पता क्या फिर ये ख्वाब हो न हो । यूँ लगता है , मेरा बसंत फिर लौट आया है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

फिक्र है के...... महोब्बत न रुठ जये

 फिक्र है के......  महोब्बत न रुठ जये ,  मेरे किसी अजीज की । दिल का बड़ा नाजुक है वो... टूट गया तो , बिखर जायेगा वो । हिम्मत नही जुटा पाएगा वो , के चले वीराने में । आदत नही उसे के ,  तेरे बिना रह सके वो । तू ही ख्याल है उसका ,  तू ही ख्वाब है । यकीन नही मुझे के ,  तेरे बिन क्या जी सकेगा वो ।  ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

दर्द से रिश्ता , हर किसका होता है

दर्द से रिश्ता , हर किसका होता है  ऐ दोस्त ! फर्क सिर्फ इतना सा है ... कोई पी जाता है ,  चुप रह कर । और....! कोई छलका देता , आंसुओं में बहा कर  । **** कुछ बीत गयी है जिंदगी ,  कुछ और बितानी है । संग तेरा यूँ ही बना रहे तो...! हर दिन सुहाना और...! हर रात मस्तानी है ।  **** वो आए और आ के , चले गए । कुछ कहा भी नहीं और....! सब कुछ कह के भी चले गए । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

गैल नि न तुम म्यारा , कन्नी या गेल्याण छ (गढ़वाली)।

 गैल नि न तुम म्यारा , कन्नी या गेल्याण छ । माया भी या भिंडी छ , फिर किले से मैसी दूर छ । दिल का आस पास छ , प्रीत लुकीं छुपीं हमारी । खयाळ कब तक रालू यू , कब तकै की आस छ । दिल का एक क्वाणा मू  , बाँद तेरी मुखड़ी छ । रात का अंधेरा मु यकुली , सारू मेरु यू ही छ । सर आंदि भैर तू , ज्वान जनी दिखेंदी छ । गैल नि न तुम म्यारा , कन्नी या गेल्याण छ , माया भी या भिंडी छ , फिर किले मैसी दूर छ । ❤️ ✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी

यूँ तो तेरी इस , रंग ए महफ़िल में ।

 यूँ तो तेरी इस , रंग ए महफ़िल में । तरानों की कोई , कमी न थी । मगर छेड़ दे जो , मेरे दिल के तार । ऐसा कोई , फनकार न मिला । *** खुद को जलाकर , खाक कर दिया हमने । फिर कैसे न कहें हम के , तेरे तलबगार हम नही । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

मेरा आना लौट कर मुमकिन है बस..

 खिंच जाए जो लकीर , बन कर दरार रिश्तों में । फासले हो जो इजात , दरम्यां दिलों के । न पैदा करो हालात कभी ऐसे , जो घाव दुखता रहे , नासूर बनकर । **** न रास्ता कठिन होता है , न आसान होता । बस वो राही पर , निर्भर करता है कि वो कितना धैर्यवान है ।  जो परस्थितियों से न घबराए , मंज़िल उसी को मिला करती है । **** मेरा आना लौट कर  मुमकिन है बस.. ये बात अलग है कि , तुम हमसफ़र बन कर न चलो।  जो शब्द पिरोये है हमने , तन्हाई में अक्सर.. रहा अक्स तेरा , मेरी नज़रों के समाने। बस इक दीवार ही थी ,आर पार नज़र आता था ... कभी हम देखते थे तुम्हें , कभी तुम शरमा जाती थी , ख्यालों में। **** कुछ कुछ अब , अहसास होने लगा है । की शायद , यह रोशनी ही मुझे.... अंधकार में डुबो जाएगी । फिर न हसरत ही रहेगी ,जीने की ... और न आरजू ही , मारने की । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

खुद से खुद की , पहचान कर ।

 खुद से खुद की , पहचान कर । खुद से खुद सवाल कर । तेरा जन्म हुआ ,किस अर्थ भला । खुद में तू  जवाब , तलास कर । देखना जमाना भी , चल पड़ेगा पीछे तेरे । खुद को इतना , कामयाब कर । हो गुमान तुझ पर जमाने का,  रह सादगी में तू ,  न कभी अभिमान कर । रख दिल में दया भाव , सब के लिए । सज्जन तो सज्जन , दुर्जन भी प्रभावित हो । बने मिशाल तू जमाने में , ऐसा तू काम कर । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

न चल अंगारों में , तपिस बहुत है ।

 न चल अंगारों में , तपिस बहुत है । जल कर खाक न हो जाये कहीं, हसरत तेरे इश्क़ की ।। ******** यदि कभी न उतर पाऊँ खरा , तेरे पैमाने पर । गुजारिश है तुझसे , बेबफाई का इल्जाम न देना । होगी कोई मजबूरी उनकी ... यह कह कर , अपने दिल को समझा लेना ।। ********* कोशिश बहुत की छुपाने की इश्क , मगर हमारी सूरत ,  हाल ऐ दिल बयाँ कर गयी । पल पल गुजर रहा है.....  वक्त अब हमारा , सालों के "हिसाब " दिन करीब न आए कभी वो , शबब बने जो जुदाई का ।। ******* इलज़ाम बेदर्दी का , न लगाव मुझ पर ।  हमने अक्सर , दर्द को ही पिया है। भीड़ बहुत थी जहां में मगर ,  हर पल हमने खुद को , तन्हां होकर कर ही जिया है । ******** मिला मुक्कदर , कुछ पल ही सही । मगर खुश रहने के लिए....... यह दौर  मुलाकात का  , काफी है हमारे लिए । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

तुझसे क्या सिकवा करे , गर तुम रूठ भी जाओ तो ।

तुझसे क्या सिकवा करे , गर तुम रूठ भी जाओ तो । फख्र  ही करेंगे हम तुझ पर ।। कि वक्त थोड़े ही सही , मगर तुमने मोहब्बत  हम से की है । ले लेंगे इल्जाम, बेवफ़ाई का सर अपने । मोहब्बत में अक्सर कहां , वफा सब को मिला करती है । ✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी