तेरी कातिल आंखें है..। अप्रैल 29, 2024 तेरी कातिल आंखें है , यह लोग कहते है । इक बार इधर तो देखो ,ये हुस्न ए बाहर । हम इन आंखों से, कत्ल होना चाहते है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी और पढ़ें
वो मेरे आंसू थे ... अप्रैल 23, 2024 वो मेरे आंसू थे , जो छलक गए अंखियों के झरोखों से । आह...! आई किसी की याद आज , सच कई दिनों से । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी । और पढ़ें