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तेरी कातिल आंखें है..।

तेरी कातिल आंखें है , यह लोग कहते है । इक बार इधर तो देखो ,ये हुस्न ए बाहर । हम इन आंखों से, कत्ल होना चाहते है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

वो मेरे आंसू थे ...

वो मेरे आंसू थे ,  जो छलक गए अंखियों के झरोखों से ।  आह...!  आई किसी की याद आज , सच कई दिनों से । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।