उठा जो चिलमन फ़रवरी 02, 2025 उठा जो चिलमन , इक झलक सी नजर आई हो । हुए बेपर्दा जो तुम , कुछ सिमटी सी कुछ शरमाई हो । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी और पढ़ें
करवटें बदल बदल कर अब फ़रवरी 02, 2025 करवटें बदल बदल कर अब , मेरी रात गुजरती है । उफ्फ ! काश कि वो आएं , और कोई बात बने ।। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी और पढ़ें