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सो जाओ कि रात , बहुत हो चुकी है ।

सो जाओ कि रात , बहुत हो चुकी है । इंतजार में है ख्वाब , आंखों में आने को । कही सुबह ना हो जाए ,  हसीं ख्वाब कहीं रह ना जाए । देखो चांद भी अब , कर रहा है इशारे । सज रही बरात , अब सितारों की । देखो शायद कोई तारा टूटा है  कोई किसी से शायद रूठा है । कर लो पलकें बंद अब कि ,  हो जाए वो ख्वाब पूरा । जो अभी तक रहा , अधूरा है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

ना देखा तुझे दूर से...

ना देखा तुझे  दूर से ,  ना कभी करीब ही आए । तेरी तस्वीर ही है दिल में , बस...!   हम उसी से है ,प्रीत लगाए । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

अभी तो नया नया शहर है यह

 अभी तो नया नया शहर है यह ,       कदम संभालने में कुछ तो ,         मुश्किल होगी ही ।         पड़ जायेगी आदत ,       जब चलोगी रफ्ता रफ्ता । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

सीने से लगा के रखेंगे हम , तेरे दिए हर दर्द को ।

सीने से लगा के रखेंगे हम ,  तेरे दिए हर दर्द को । खुदा कसम ,  तेरे दिए हर दर्द के साथ ।  तुम , बहुत याद आते हो । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी  

तुम रहो मेरी , ये चाहत मेरी ।

 तुम रहो मेरी , ये चाहत है मेरी । जिसे किया है  मैंने रोशन , अपनी  चाहतों के चिराग से । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

कभी हँस लिऐ खिलखिलाकर

कभी हँस लिऐ खिलखिलाकर , कभी रो लिऐ  आँसु बाहकर ।  कट गये दिन चार जवानी के यूँ ही,  फक़त चन्द साँसे ही बाकी रह गई है । अब ये भी थम जाऐगी , आखिर दम तलक तेरा नाम लेकर ॥ ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 

उनकी महफिल में हमने....

उनकी महफिल में हमने ,  बहुत कुछ खोया और , बहुत कुछ पाया है । ले आए बोझ भरकर दिल में , कुछ आंखों से ओझल कर । आ मेरी तनहाई गले लग जा , तुझसे मुलाकात का , सिलसिला भी अभी बाकी है । मिला क्या क्या रंज ओ गम , उनकी महफिल से ।  ये हिसाब लगाना भी, अभी बाकी है । ✍ज्योति प्रसाद रतूड़ी

गुजर जाए आज चंद लम्हें ही...

गुजर जाए आज चंद लम्हें  ही ,  सकून से वो ही सही , तेरी  आगोश में । बन जाएंगी याद वो , तन्हा  रहेंगे हम जब कभी । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

कितने है दिन ? ना जाने जो गुजरे तेरी यादों में ।

 कितने है दिन ?  ना जाने जो गुजरे , तेरी यादों में । अफसोस है कि...  एक भी दिन हमारा , हमारा न हुआ । के तू कहे पास आके ,  हमें कि तुम.....! बहुत नही पर कुछ ही तुम , याद आते हो । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

यूं तो जिंदगी ने बहुत कुछ सीखा दिया था मगर ...

यूं तो जिंदगी ने बहुत कुछ ,  सीखा दिया था मगर । बस इक कमी रह गई ,  हम शराफत न छोड़ सके । ** मोहब्बत कितनी भी कर लो ,दिल से , मगर... लोगो को सच्चे दिल वाले नहीं,  बल्कि.... अच्छी शक्ल वाले ही पसंद आते है । ** इनके मासूमियत पे मत जाना ,  बड़े जालिम है ये  कांटे बाबुल के । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

तुम बिन बिरानें है फिजाओं में ।

तुम बिन बिरानें है फिजाओं में ,  अब वो पहली सी रंगत कहाँ । थे जब तुम संग तो ,रौनकें ही रौनकें थी ।  अब तो चारों तरफ है , खिजाँ ही खिजाँ। ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

चिलाना बंद करो तुम , ऐ धूर्तों....!

चिलाना बंद करो तुम , ऐ धूर्तों....!  कितनी भी सफाई क्यों न ,  दे दो तुम अब..... कुछ नही होने वाला ।  तुम्हारी यह कोशिश बेकार है कि , तुम फिल्म रुकवाने में..... कामयाब हो जाओगे । सनातन अब जाग चुका है.... बहुत जुल्म ओ सितम , किए है तुमने । अब आ टक्करा..... बन गया हूं मैं फौलाद का अब , आग में तपते तपते । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी #कश्मीर फाइल

मुकद्दर वाला होगा वो ....

मुकद्दर वाला होगा वो ,  जिसे आपकी दोस्ती हासिल है दिल से.... हम तो यूं ही चकोर बनकर , चांद को निहारते है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

बस इक खूबसूरत सा सफर , उसमें आप और हम ।

बस इक खूबसूरत सा सफर , उसमें आप और हम । रह गई ये आरजू भी ,दिल के किसी कोने में दफन । इस बेबसी में , करें तो क्या करें हम । मिलन हो तो कैसे.... ? आएं तो आएं कैसे..? पहरे जमाने ने , बहुत बिठाए हुए है । रहना मुश्किल है अब , इन अंधेरों में सनम ! बुझते हुए चिराग दिल के , जलाएं तो जलाएं कैसे ? ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

वक्त करता जो वफा , आप ! हमसे भी मिलते ।

वक्त करता जो  वफा , आप ! हमसे भी मिलते । करते गूफ्तगू मिलकर , हाल ए मिजाज पूछते । जुबां खामोश होती मगर , मुलाकात फिर भी होती । आखों से आखें मिलती दिल से दिल । मगर मायूस हूं अब कि तुम , बिना मिले जा रहे हो जब । ☹️ ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

बदल गया मौसम भी और , वो इंसान भी ।

बदल गया मौसम भी और  , वो इंसान भी । जिन्हें गुमान था कि,  हम नही बदलने वाले । हुआ आज अहसास और , देख लिया भी । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

कैसे करे इश्क यहां ,

कैसे करे इश्क यहां ,  इस...! बेईमान हुस्न की , दुनिया में । सेज उल्फत की ,  रकीबों की खातिर सजी हो ।  और...! बनकर हम कदम , संग वो हमारे चले । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

ये तेरी ख़ामोशी , ये तेरा उदास मन ।

ये तेरी ख़ामोशी , ये तेरा उदास मन । कहीं हमारी जान  ना ले ले सनम । नहीं बर्दास्त मुझे कोई भी  तेरा गम । तुम क्या जानों तुम क्या हो मेरे , मेरी जिंदगी हो तुम  । एक अहसास है प्यार का जो , तेरे दिल से ही तो पाया है मैंने । तुझसे मिलने के बाद ही तो , जिंदगी को जाना मैंने । किस कदर छुपा कर गम , मुस्कुराते है लोग , यह राज है जिंदगी का एक खूब सूरत इल्म ,  वो तुझसे ही जाना मैंने । तू प्यार है किसी और का , तेरी दुनिया तेरे लोग । खुश रहो तुम सदा , अपनी प्यार भरी दुनिया में । कहीं मेरा दर्द ना बन जाए , तेरे दिल का कोई रोग । तेरी दुनिया से , मै अब चला जाऊंगा । सपना  समझ कर , भूल जाना मुझे , अब न तेरी दुनिया में , मैं वापस आऊंगा । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

कुछ बदला बदला सा यार ..

कुछ बदला बदला सा यार ,  आज नजर आ रहा है । वो दौर पहली मुलाकात का ,  मुझे आज याद आ रहा है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

पा के प्यार उसका कैसे , भूल जाऊँ मैं ।

 पा के प्यार उसका कैसे ,  भूल  जाऊँ मैं ।  जिसने कई रातें गुजारी हो ,  मेरे इंतज़ार में । हां ये बात अलग है अब , वो पहला सा प्यार नहीं । मगर रह जाए वो मेरे बिन जुदा , यह मुमकिन भी नही । दिखने चाहिए इक दूजे को ,  पल पल झलक इक दूजे की । वरना दिल , बहुत घबरा जाता है । रहे साथ यह भी तो , नही सुहाता है । यह कैसा प्यार है मेरे प्रभु !  यह मुझे समझ में , क्यों नहीं आता है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

जीने का तरीका बदला तो

 जीने का  तरीका बदला तो ,  दुनिया वो जो , हमकदम चलती थी ।  आज वो हमें , न जाने क्यूं ? बेगानी सी ,  लगने लगी है । 🤔 जीने के नए तरीके ढूंढ , ऐ  जिंदगी ! ताकि हम कुछ बन जाए , उतरे है आज , जिसकी नजरों से हम ,  उन्हीं के दिल में हम उतर जाए । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी