सो जाओ कि रात , बहुत हो चुकी है । इंतजार में है ख्वाब , आंखों में आने को । कही सुबह ना हो जाए , हसीं ख्वाब कहीं रह ना जाए । देखो चांद भी अब , कर रहा है इशारे । सज रही बरात , अब सितारों की । देखो शायद कोई तारा टूटा है कोई किसी से शायद रूठा है । कर लो पलकें बंद अब कि , हो जाए वो ख्वाब पूरा । जो अभी तक रहा , अधूरा है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी