कहूं क्या किस कदर अब बसर हो रही है जिंदगी जनवरी 06, 2025 कहूं क्या किस कदर अब , बसर हो रही है जिंदगी । बस कट रही है किसी तरह से , तन्हां तन्हा...! ख्यालों में से होकर अब , गुजरी रही है जिंदगी । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी और पढ़ें