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कहूं क्या किस कदर अब बसर हो रही है जिंदगी

 कहूं क्या किस कदर अब , बसर हो रही है जिंदगी । बस कट रही है किसी तरह से , तन्हां तन्हा...! ख्यालों में से होकर अब , गुजरी रही है जिंदगी । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी