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बड़ी बर्बादियां लेकर...

 बड़ी बर्बादिया लेकर , दुनिया में प्यार आया । कभी उनके तो कभी , मेरे चेहरे पर निखार आया । चाहत थी हमें फूलों की मगर , हिस्से में अपने खार आया । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

हूं तो मैं ,यहीं पर ही मगर ।

हूं तो मैं ,यहीं पर ही  मगर । दिल ना जाने कहां , गुम हुआ जाता है । आओ तो इधर जरा पास हमारे , ढूंढू तो लूं मैं , इसे तेरे दिल में । है शायद , तुझ में ही दिल मेरा । रह रह कर बस मुझे ,  तेरा ही ख्याल आ जाता है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

उनकी जरूरत ही अक्सर , मेरा पता पूछती है ।

उनकी जरूरत ही अक्सर ,  मेरा पता पूछती है  । बस मतलब तक ही मुलाकात ,  और कुछ देर तक का ठहर है उनका  । फिर क्या ? कई दिनों तक की ,  खामोशी वो इख्तेयार कर लेती है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी