ऐ मेरे बचपन तू लौट आ , मुझे तेरे बहुत याद आ रही है । मां का लाड बाप की डांट, भाई बहनों का प्यार । संग सखाओं की हमझोली , वो नंगे पांव का चलाना । फटा झगा तन में , वो शान से चलाना कुचे कूचे । आ लौट आ मेरे बचपन , मुझे तेरे याद आ रही है । वो खाने की थाली मां की परोशी , वो नखरे मेरे खाना ना खाने के । ना पसंदी में उठकर , खाना छोड़ना और रूढ़ जाना । मां का मनाना , प्यार से पुचकारना । अपने हाथों से फिर , मुझे खाना खिलाना । नलहना धुलाना , प्यार से संग अपने बाजार घूमांना । हाय कितना अच्छा था , बचपन का वो गुजारा जमाना । ऐ मेरे बचपन तू लौट आ , मुझे तेरी बहुत याद आ रही है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी