तेरी यादों ने एक पल भी , सोने नहीं दिया । पलकों के बंद होते , चेहरा तेरा दिखता था । हर करवट पर , तेरे होने का एहसास । ना जाने क्यों , मुझे हुआ करता था । क्यूं होता है मुझे ऐसा , अक्सर । तू है क्या , मुझ में बसर ? ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
दूर तक जहां भी निगाहें , जाती हो । हो सकून ए जिन्दगी की , राहें वो । मोहब्बत मिले तुम्हें , हर किसी से । गम का नमो निशां , बाकी न हो । 🎂जन्म दिवस की , हार्दिक शुभकामनाएं पुत्र !🎂 04/01/2023 ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।
ये राहें गुजरते वक्त का , निशां होंगी । पलकों में जमी गर्त , उम्र की ढलान लिए । यादों में संजोए होंगे गुजरे पल , कुछ खट्टे कुछ मीठे । एक लालसाई भर ये नज़र , जब तरसेगी , देखने इन राहों को । फिर कौन दिखायेगा , इन नजारों को । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी