खोटा सिक्का और , नालायक औलाद ।
भले चले नही ,
पर सदैव , अपने ही पास रहती है ।
यह मैं नही कह रहा , यह कहावत है ।
सुना था मैंने , दादा जी से बचपन में ।
याद आया तो , सोचा बता दूं ।
अब जब बात , चल ही रही है तो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
खोटा सिक्का और , नालायक औलाद ।
भले चले नही ,
पर सदैव , अपने ही पास रहती है ।
यह मैं नही कह रहा , यह कहावत है ।
सुना था मैंने , दादा जी से बचपन में ।
याद आया तो , सोचा बता दूं ।
अब जब बात , चल ही रही है तो ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें