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तुम न आये संग तो क्या , हम अकेले भी ना आये ।

 तुम न आये संग तो क्या , हम अकेले भी ना आये ।

 चले थे जो दो चार कदम संग , हम गुफ्तगू में ।

रहा हाथों में हाथ और , संग जो हम मुस्कुराए ।

उन हसीं पलों की खूबसूरत , यादें हम संग ले आये ।

शरूर तेरे जाम ए हुश्न का , है अब तलक ।

 हम अपना शकुन वो चैन , तेरे शहर खो आये ।

वक्त ही नही अब पास मेरे , सोचें जो हम और कुछ ।

अपना तो हर वक्त को हम , नाम तेरे कर आये ।

 तुम न आये संग तो क्या , हम अकेले भी ना आये ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 

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