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काश कोई हवा का झौंका , ले के आये पहगाम उनका ।

काश कोई हवा का झौंका , ले के आये पहगाम उनका ।

किस हाल में गुजरा होगा , सफर उनका ।

याद करते होंगे क्या वो हमें , या वक्त न मिला होगा ।

होंगे मजबूर शायद , हाल ऐ दिल सुनाने को

कोशिश तो की होगी बहुत, हमे पहगाम देने की ।

पहगाम लिखने का शायद , पास उनके वक्त न रहा होगा ।

या मसरूफ होगी , महफ़िल ए जश्न ऐ बाहार में ।

इसलिए शायद , मेरा ख्याल न रहा होगा ।

❤️

आज कुछ अजीब सा महसूस , होने लगा है मुझे ।

जैसे कोई कहीं , याद कर रहा होगा मुझे ।

वहीं वक्त गुजरा जब इक पल के लिए , थम गये थे हम ।

उसी जगह जहां रुक कर , ढेरो बातें किया करते थे हम ।❤️

वादा किया है साथ निभाने का , सुख दुख में रहेंगे साथ सदा ।

होंगे दूर जो कभी , यादों में समेटे रहंगे ।

हम तुम , इक दुझे को सदा ।

खुदा न करे आये जो , नौबत ऐसी कभी ।

जो हो कभी हम तुम , एक दुजे से जुदा ।

❤️

हकीम तुम हो , इलाज ऐ इश्क ।

मुहब्बत दावा है , मेरे बीमार ए दिल की ।

❤️

दर्द से रिश्ता बहुत , गहरा है ऐ दोस्त !

मिले आप तो हम , अपना गम भूल गए ।

❤️

उदास न हो दिल , कुछ लम्हें ही तो है ।

बहार फिर आएगी प्यार की ,  बहार का इंतज़ार कर । 

यह सफर है जिंदगी भर का , इसमें  धुप कभी छाँव तो होगी।  

 सुख का सवेरा भी तो कभी  , तन्हाई की रात भी होगी ।

❤️

इंतज़ार कर रही है तेरा , मेरी नम आंखे । 

थक सी गई है मेरी साँसे ।

तड़प कर बेहाल हुआ जाता है दिल !

गुज़र मुश्किल है बिन तेरे ,

कहाँ हो तुम , वो दिलवर मेरे  । ❤️

✍🏼 ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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