हे जी सुणा , मयाली बाँदा !
सवाणी मुखड़ी , झिलमांदि चाँदा ।
कै गौं की होली रे ।
नाके नाथुली , गोले गुलबन्द ,
हाथियों म पौंछई साजणी ।
ठुम ठुम हिटनी , झियुरी बजैकि ,
कै दिशा होली छाई जाणि ।
हे सुणा मयाली बाँदा....
हे मुलमुल कै कु , तेरु हासाणु ।
मुड़ मुड़ मैकू तेरु देखणु ,
मी तैं रिझाणु ।
यों अँखियों कु शान ,
शानी शानियों म , मेरा मन म समाणु ।
बतै देवा अपणा , मन की बात ।
कुबालान्दु मेरु जियूँ प्राण ,
हियूंदै धाम न जनी , सैली पड़ी जांद ।
आँखियों म तू म्यारा , रिंगणी किले छ ।
ढुङ्गु थौ प्राण मेरु , अब क्वांसूं किले छ ।
बिराणी माया मु , यू बोल्या किले छ ।
बिंगी नि मैं या , बात किले छ ।
ठहरा इच्छी , कुछ त बिंगें द्या ।
अपना मनै की , कुछ त बतै द्या ।
कुछ त बतै द्या ....
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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