तिल तिल कर जले जो दीप ,
दूसरों के लिए के , रोशन हो घर उनका ।
उसी पर लगा रहे है आरोप ,
घर जलाने का ।
कुछ बेईमान नेता भी आज ,
ईमान की परिभाषा बता रहे है ।
देखिये साजिशें इन मक्कारों की ,
झोंक कर समाज को आग में ।
और बुझाने के नाटक में ,
खुद आग तापे जा रहे ।
एक मोदी के विरोध में खड़े ,
अनेक बेईमान ।
जनता सब जानती है ,
मगर अफसोस के , कुछ फ्री तो कुछ ।
अपनी जात वालों को ही , पहचानती है ।
@रतूड़ी
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