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क्याजु होई होलु रे आज ।(गढ़वाली)

क्याजु होई होलु रे आज , 

क्याजु होई होलु रे आज ।

किले होली रे आज रूसाईं , 

मेरी भाग्यनि ।

छुईमुई सी शर्मीली सी नाख्रियाली , 

मेरी बंदोला ।

मेरी प्यारी , मेरी गेल्याणी ।

किले होली रे आज रूसाईं ।

आयीं त छ उ धार मँगार , 

मीतें किले नि बचलियाई होलु ।

क्याजु होई होलु रे आज , 

बिन धै लगे बोड़ी किले वा ।

न त दीनी रन्त रैबार , न समूण कै मा ।

सासा लागैकि मीतें रुमणैकि , 

जाणि कुजाणी कख जै वा ।

मेरु क्वांसूं शारील खुदेण प्राण , 

रूढ़ियों का ये धाम मा ।

धारू धारू बाट अबाट , रयों मी वीं खोजदा ।

✍🏼ज्योति प्रसाद रतूड़ी



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