बस बस !!
बहुत देखे है दिल फैंक , तेरे जैसे ।
मैं वो शम्मा नही , जो पिघल जाऊंगी ।
ज्वालामुखी की , धधकती ज्वाला हूँ मैं ।
पास आने की , कोशिश भी न करना ।
वरना पलक झपकते ही , तुझे !
मैं , निगल जाउंगी ।
होने की कत्ल , मनसा तेरी जो ।
तो कही और जाकर , कत्ल हो ।
बे बजह ये इलज़ाम ए जुर्म , हम अपने सर लेते नही ।
😂😂😂
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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