चलो नही पूछते हम , वजह कोई ।
के हम अच्छे , क्यों लगते है ।
मगर इत्ता तो पूछ सकते है हम ।
आखिर कब से ,
तुम्हें अच्छे ,लगाने लगे है हम ।
फिर वजह तो हम ,जान ही जाएंगे ।
तुम्हारी निगाहों को ,
अच्छे से पहचानते है हम ।
यूँ ही तारीफ बे वजह तो ,
तुम नही करते ।
चलो जो भी वजह वो ,शुक्र है ।
सकून है के आज तुम्हें ,अच्छे लगे हम ।
रखना याद की बापू , कोतवाल है मेरा ।
कुछ गड़बड़ की तो ,अंदर करवा देंगे तुम्हें हम ।😂
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें