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कभी तो हम को भी ,कराओ । एहसास , अपनो गर्म साँसों का ।

कभी तो हम को भी ,कराओ । 

एहसास , अपनो गर्म साँसों का ।

सहराओं , कभी हमको भी ।

एक रात का संग रहने का , मौका दे दो ।

हो जाये हम भी , तर ओ ताज़ा ।

संग रात ढलने का , इक मौका दे दो ।

गर्म जिस्म तेरा , 

सर्द हम ,जमी नब्ज लहू की ।

अपनी आगोश में लेकर ,

अपनी आगोश में लेकर ।

नब्ज में लहू की , रवानगी दे दो ।

संग रात ढलने का , इक मौका दे दो ।

रह ना जाये कहीं , खलिश  मोहब्बत की परे ,

रह ना जाये कहीं , खलिश मोहब्बत की परे ।

मोहब्बत को करीब आने का , मौका दे दो ।

कभी तो हम को भी ,कराओ । 

एहसास , अपनो गर्म साँसों का ।

सहराओं , कभी हमको भी ।

एक रात का संग रहने का , मौका दे दो ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी


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