न ललकार , मुझे कहे देता हूँ ।
दम बहुत है मुझमें , कहे देता हूँ ।
तुम मंजूरी दो तो मैं , न चुप रहूँ ।
तुम जो कहो तो ?
मुझे इंतज़ार है तो , सिर्फ तेरी ।
पहल का जो , तुम जो करो तो ।
दिल से कहो !!
देखो !! फिर ना कहना , कुछ ।
हो जाये जो , जोश जोश में ।
खो जाए , होश जो ।
मुझ अकेले को ही , बाद में दोष न देना ।
मन मे फिर कोई , बोझ न रखना ।
जीना बोझ लगने लगे ,
ऐसा कुछ , ख्याल न रखना ।
समझना कि जैसे , कुछ हुआ ही नही ।
जैसे अब हो तब भी , खुद को ।
खुश और चेहरे पर , मुस्कान रखना ।
हो मंज़ूर जो ये शर्त तो , मैं तैयार हूँ ।
खुद को भी तुम , तैयार रखना ।
😂😂😂
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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