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खुद से खुद की , पहचान कर ।

खुद से खुद की , पहचान कर ।

खुद से खुद सवाल कर ।

तेरा जन्म हुआ ,किस अर्थ भला ।

खुद में तू  जवाब , तलास कर ।

देखना जमाना भी , चल पड़ेगा पीछे तेरे ।

खुद को इतना , कामयाब कर ।

हो गुमान तुझ पर जमाने का, 

रह सादगी में तू , 

न कभी अभिमान कर ।

रख दिल में दया भाव , सब के लिए ।

सज्जन तो सज्जन , दुर्जन भी प्रभावित हो ।

बने मिशाल तू जमाने में , ऐसा तू काम कर ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी



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