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मेरे दिल की धड़कनों में सुन , आकर तू ज़रा ।

 मेरे दिल की धड़कनों में सुन , आकर तू ज़रा ।

धड़कता है ये क्यों  , तेरा ही नाम लेकर ।

आकर देख ज़रा , हाल मेरी रातों की तन्हाई का ।

क्यों कटती है ये रातें मेरी , तेरा ही ख्याल लेकर ।

कहीं ये इश्क तो नही ? 

आकर कर जाओ फैसला , हर्जाने में मेरा दिल लेकर ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी


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