तुम मुझे बहुत , याद आती हो माँ ।
नींद तो आती है अब भी , मगर माँ !
अब वो फुरसत की , नींद कहाँ !
जो थी कभी तेरी गोद में ,
तेरी अंचल की छांव तले ।
नही है अब कोई , जो सुलाये मुझे ,
मेरे सिर को सहलाये ।
मेरे दिल की जाने जो ,
मेरे मन की माने जो ।
नही है कोई तेरे सिवा माँ !
तुम बिन सूना है मेरा ,
दिल का जहाँ ।
तुम मुझे बहुत , याद आती हो माँ ।
😭😭😭😭😭😭😭😭
@ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें