काटी त खटाई दीदों , मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भूलों , बोड़ीक नि औण ।
काटी त खटाई दीदियों , मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भूलियों , लौटी क नि औण ।
माँ जी की खोकली , धरि त सिरवाण ।
बचपन की नींद स्य , अब नि औण ।
बचपन का दिन दीदो, लौटी क नि औण ।
काटी त खटाई भूलों , मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भूलियों, लौटिक नि औण ।
मांजी की पकाईं रस्वे , खाणे की रस्यांण ।
मॉं जी की पकाईं दीदियों, अब कखन खाण ।
दिन बचपन का भैजियों , समळोंणिया रै जाण ।
भाई बैणियों की माया दीदों , याद रै जाण ।
काटी त खटाई दिदों , मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भैजियो , बोड़ीक नि औण ।
बाबा जी की फटकार त , माँजी कु लाड ।
गैलियों की धौंस त , गैलाणियों की बात ।
दिनै की रूढ़ियों म तपणु , अर मयाली स्या रात ।
याद रै जाण भुलियों , ब्वे बाबू साथ ।
काटी त खटाई भुलों, मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भुलियों , लौटिक नि औण ।
दिनै थकान अर भूलों , रात झट सै जाण ।
आँखियों मुन्जी क फिर , अदनिन्द म खाण ।
माँ की मामता अर , बाबा कु लाड ।
मुंडाली फ्लोसी मांजी कु , काख मी सिवांळ ।
बचपन दिन सि भुलियों , बोडिक नि औण ।
बचपन का दिन भुळों , लौटीक नि आण ।
काटी त खटाई दिदों , मिलाई त लोण ।
बचपन का दिन भुलो , बोड़ीक नि औण ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
वाह भेजी गजब बल
जवाब देंहटाएंआपकु आभार भुला !
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