सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

इक बार ही सही मगर , साथ मेरा.....!

इक बार ही सही मगर ,

साथ मेरा.....!

कुछ दूर तक तो दीजिये ।

जिंदगी खुशनुमा बन जयेगी ज़रा , 

संग अपने.....!

मुस्कुराने की इजाज़त तो दीजिये ।

आ गुनगुनाये , गीत कोई ।

 राग कोई , प्यार का ।

संग मेरी आवाज में , 

अपनी आवाज तो दीजिये ।

माना कि बहुत खुश है तू ,

बनकर चाँद...!

सितारों की महफ़िल में ।

इक बार ही सही मगर ,

जमीं पर उतर कर....!

खिदमत का हमें , मौका तो दीजिये ।

इक बार ही सही मगर ,

साथ मेरा.....!

कुछ दूर तक तो दीजिये ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी



टिप्पणियाँ