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कर तो लूँ मैं कलमबद्ध तुझे अपनी शायरियों में मैं मगर ।

 कर तो लूँ मैं कलमबद्ध तुझे अपनी शायरियों में मैं मगर ।

 मैं नही चाहता कि तुझे , मेरे सिवा  कोई और पढ़े ।

हो न क्यों मुझे रश्क भला , चाँद सी बला की सुंदरता जो तूने पाई है ।

मुद्दतों से की इबादत जब , खुदा की मैने । 

तब तुझ सी हसीना , इस दिल में समाई है ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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