सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जरूरी नही के हर मुस्कुराने वाला , दिल से मुस्कुरा रहा हो ।

 जरूरी नही के हर मुस्कुराने वाला ,

दिल से मुस्कुरा रहा हो ।


हो सकता है के , अपनों के दिए ज़ख्मों को ।

दुनिया से , छुपा रहा हो ।


नश्तर से चुभे शब्द , अपनों के दिल पर ।

फिर भी  महफ़िल में , शिरकत उसकी । 


ये न समझो के , तन्हां नही है वो ।

 हो सकता है के वो , गमों से समझौता कर । 

दुनियां के सामने , रिश्ता निभा रहा हो ।


जरूरी नही हर मुस्कुराने वाला , दिल से मुस्कुरा रहा हो ।


हो सकता है के , अपनों के दिए ज़ख्मों को ।

दुनिया से , छुपा रहा हो ।


✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

टिप्पणियाँ