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वह कौन मिली है तुम्हें , मुझे भी बताओ ?

 👧वह कौन मिली है तुम्हें , 

मुझे भी बताओ ?

जो बनी है राज़ ए खुश मिज़ाजी का , 

तेरे चेहरे की वो नूर ।

ये किसके होने से  दमका है , 

तेरा दिल का आंगन ।

ज़रा , हमें भी समझाओ ।

👦वो तुम , उसे जानते हो 😘

👧मैं भला कैसे जानू ? 

जरा हमें तो समझाओ ।

👦वो तुम ही तो हो ।

👧नहीं😱😱ये नहीं हो सकता ।

👦हो चुका है अब , 😘

धीरे धीरे तुम , न जाने कब ।

मेरे दिल में , समा गयी हो ।

ना हमें मालूम हुआ , ना तुम्हें ही मालूम हुआ ।

कब जाके तुम मेरे  दिल ए हाकिम हो गए हो । 

कसम से तुम्हारे ही ,नाम से । 

मेरे बीमार ए दिल को , आराम आ जाता है ।

न करो यकीन मगर , यह हकीकत है ।

तुम ही दवा हो मेरी , बेचैन मन की ।

तुम ही तो ठंडी उबटन हो मेरे , जलते हूए बदन की ।

तुम ही तो अब सिफ़ा हो ,  मेरे हर ज़ख्म का ।

लौटा है तुमसे ही नूर , मेरे बुझते हुए चेहरे का ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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