नादान सा हूँ मगर , ना समझ नही । मई 06, 2021 नादान सा हूँ मगर , ना समझ नही ।तेरी हर बातों का, मतलब ।मैं , बखूबी जनता हूँ ।वो तो अदा थी मेरी , ना समझ ।तुम्हें क्या लगा था कि , हम । इशारा तेरा , समझ न सके ।✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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