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अनुभूति हुई , आज मुझे ।

अनुभूति हुई , आज मुझे ।

बेटों से  , भली बेटी ही होती है ।

कम से कम दर्द को , समझती तो है ।

 दुःख सुख में कहती तो है , 

फिक्र न करो बाबा-आई मैं हूँ न ।

खिलखिलाती मुस्कुराती हुई 

मिलने को आती तो है ।

आंसू से भरे नैनों को हमारे , पोंछ कर । 

ठहसा बंधा तो देती है ।

अपवाद हो कोई , निकल जाए पूत , सपूत ।

 वरना बेटों से , भली बेटी ही होती है ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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