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आज फिर....उनका ख्याल आया ।

आज फिर....उनका ख्याल आया ।

विसरा हुआ वक़्त , 

वो लम्हा इश्क का ।

फिर , याद आया ।

आज फिर....उनका ख्याल आया ।

वो हवाओं में ,

लहराता हुआ , उनका अंचल ।

ज़ुल्फ़ों  का उनके ,

रुख्सारों पर , बिखर जाना ।

हटाएँ चेहरे से हम ,

ज़ुल्फ़ें उनकी और , उनका शरमा जाना ।

पल दो पल , रूठ जाना ।

फिर उनका मुस्कुराकर , गले से लग जाना ।

बिसरा हुआ वक्त ,

वो लम्हा इश्क का ।

फिर , याद आया ।

आज फिर....उनका ख्याल आया ।


✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी




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