एक कशिश सी है,
तुझमें कि दिल...
तेरी ओर ,
खिंचा चला आता है ।
वरना लुभाने वाले चेहरे ,
बहुत देखे है हमने ,
हुश्न के इन बाजारों में ।
भाये इस दिल को चेहरा ,
किसी और का , तेरे सिवा ।
वो चेहरा तुझ सा.......
हमें कोई और , नजर आता नही ।
रोकने की कोशिश ,
करता हूँ बहुत के......
न करे ये प्यार तुझ से
मगर ....
इस दिल को , तेरे सिवा ।
किसी और पर ,
प्यार आता नही ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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