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काश के लौट आते दिन...बस वही हसीन पल ।

 काश के लौट आते दिन...बस वही हसीन पल ।

 जिसमे थे संग.....तुम और हम ।

 तेरी गोद और.....मेरा सर ।

तेरा अपने हाथों से मेरा , सर को सहलाना।

 और मुझे नींद.......आ जाना ।

तेरा चुपके से...मुझसे उठाकर,

माथा चूम कर...बिछौने में सुलाना ।

काश के लौट आते दिन.....बस वही हसीन पल ।

वही दिन बचपन के , मेरा खेलना कूदना 

तुझे तंग करना ।

कभी किसी , चीज़ की खातिर । 

रूठ कर मेरा बैठ जाना , और तेरा मनना । 

 हुई तो दी वरना , बड़े लाड से मुझे समझना  ।

न माना तो तेरा मुझे , आंखे दिखाना और धमकाना ।

नहलाना धुलना लाड से  , खिलाना पिलाना ।

मेरे लिए नए नए कपड़े , लाना और पहनाना ।

काश के लौट आते दिन...बस वही हसीन पल ।

 जिसमे थे संग.....तुम और हम ।

आज तू नही...तेरी यादें ही बस

माँ ! रहती है तू , मेरे संग.....हर दम ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 

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