अपना तो सूरज निकले ! जून 30, 2021 अपना तो सूरज निकले !एक अरसा हो गया है , शायद ।आशाओं की राहें तंग और , अंधकार से घिरे ।मन को लिए , अब भी ।भटक रहा हूँ मैं , जमानों से ।इक लौ की , तलाश लिए ।✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ बेनामी30 जून 2021 को 12:33 pm बजेचाहे कितना भी भटके सूरज तो निश्चित समय पर ही निकलेगा। जवाब देंहटाएंउत्तरज्योति प्रसाद रतूड़ी30 जून 2021 को 12:54 pm बजेटिप्पणी हेतु आपका आभार ।हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
चाहे कितना भी भटके सूरज तो निश्चित समय पर ही
जवाब देंहटाएंनिकलेगा।
टिप्पणी हेतु आपका आभार ।
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