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बस तानो चादर , मज़े में सो ।

 बस तानो चादर , मज़े में सो ।

खुद अब , कुछ नही है करना ।

जो करेगा , करेंगे वो ।

तुम रक्षक , काहू डरना ।

आये लूटेरे , हम भागे मंदर ।

बजाए शंख , घंटे , मृदङ्ग

जागो प्रभु ! 

चोर लुटेरे घुसे है , घर के अंदर ।

बस तानो चादर , मज़े में सो...

तूम रक्षक , काहू को डरना ।

स्वयं अब , कुछ नही है करना ।

जो करेगा ,करेंगे वो ।

 पी ज्यो दारू बीड़ी , अफीम गांजा

कर ऐश और , जा चकला घर ।

डर बाहर , दिखा आंख तू  घर के अंदर ।

बना बोझ तू  क्यों , इस धरा पर ।

आया अब , तेरा धर्म संकट पर ।

कुछ तो खुद को , तुम जगाओ ।

आलस्य और बुरी आदत को ,  तुम ।

खुद से  , दूर भगाओ ।

वरना जो करेगा , करेंगें वो ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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