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यूँ ही तो ! नही रूठ जाता है कोई , किसी से ।

 यूँ ही तो ! 

नही रूठ जाता है कोई , किसी से ।

कोई तो कारण , होता होगा ।

कुछ खामियाँ खुद पर तो , 

कुछ , उन पर भी तो होता होगा ।

यूँ ही तो ! 

नही हो जाती , जिंदगी बेवफा ।

कोई तो इसे , 

बरगलाने वाला , होता होगा ।

माना के बहुत संजीदा है हम ,

 दिल के , मुआमले में अक्सर ।

मगर हाल ए तड़प , ये कैसी ?

कुछ तो गलत हमने , 

इस दिल के साथ , किया होगा । 

परेहज इश्क था , बताया शायद । 

दिल ए हकीम ने ।

लगी दिल की तभी शायद ,

इश्क की इन्तेहाँ हो गयी ।

सोच कर इश्क , दिल ने तो ,

बेइंतहां ही किया होगा ।


✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी


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