तुम कहती हो.....!
मन जो करे , मन जो माने ,
मन जो सोचे ।
सब होये वो , जो मन चाहे ।
फिर.....!
मन चाहे तुम को तो , मन की क्यों ?
न माने तेरा मन ।
क्यों रहते है ?
मन इधर उधर , अनमने से मन ।
बोलो सखी ! बोलो !
क्या कहता है , अब तेरा मन ?
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
🤔🤔🤔
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