रहे कब साथ तुम मेरे ,
एक तन ही तो था ।
तुम्हारे...! मन की कमी तो ,
मुझे हर वक्त ही खली ।
चलो....! अच्छा ही हुआ ,
आज तन भी , तो मन भी है ।
इक दूजे से , कुछ जुदा जुदा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
रहे कब साथ तुम मेरे ,
एक तन ही तो था ।
तुम्हारे...! मन की कमी तो ,
मुझे हर वक्त ही खली ।
चलो....! अच्छा ही हुआ ,
आज तन भी , तो मन भी है ।
इक दूजे से , कुछ जुदा जुदा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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