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लुटी लुटी सी रह गयी हैं , जिंदगी की ख्वाइशें तन्हां । तुम साथ होते तो !

 लुटी लुटी सी रह गयी हैं , जिंदगी की ख्वाइशें तन्हां ।

 तुम साथ होते तो ! 

कुछ और बात होती  , तो कुछ और बात होती ।

होते जज़्ब गम और  ,लव मुस्कुराते ।

तन्हाइयों से होते दूर हम , जो तुम साथ होते तो !

कुछ और बात होती , तो कुछ और बात होती ।

कई बार हमने चाह , आ जाये तेरे कूचे ।

फिर तेरे गरूर का , हमें ख्याल आया ।

दिल लगी क्या है ये , मगरूर तू क्या जाने ।

गर तुम गरूर से , निकल आते तो !

कुछ और बात होती , तो कुछ और बात होती ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी




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