हमने अब जाना , तिलस्म क्या है ,
तेरे इस हजूम का ।
हर एक के हाथ में है प्याला ,
और इंतज़ार है तेरी शराब का ।
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दावा तो यूँ है के ,
सताए हुए है ये सरकार ।
हमसे तो यही भले ,
पी खा कर मस्त से.....लेते ये डकार ।
ये आंदोलन है किसान का ,
दावा जबरदस्त है भारी ।
तेरी तू जाने ,अपनी तो ,
निकल पड़ी है , पटरी पर ।
मौज़ मस्ती की , गाड़ी ।
आजा आजा तू भी आज ,
पहन टोपी हरे वाला ।
खेती का तो , तू बन न सकेगा ,
हाँ बन किसान तू सड़कों वाला ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
#किसान आंदोलन
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