औ दें कि अब त ज्याणी कु ज्याणी , बसंत कथगा चली गै ।
मी जग्वाल म छों तखि मू , जख तू औण क बोलगी थै ।
औ दे कुछ छुई त लगवा यनि कि , जु रस्यांण ऐ ज्याली ।
भिण्डी दिनु कु खुदियूं मन , तेरा बिग़ैर....
जरा औ दें मुलमूल हैंसी जा दें कि ,
वरषु बटी कुंद मेरी मुखड़ी , दिखी त्वे हैंसी ज्याली ।
औ दें कुछ छुईं त लगवा यनि कि , जु रस्यांण ऐ ज्याली ।
औ दें कि अब त ज्याणी कु ज्याणी , बसंत कथगा चली गै ।
मी जग्वाल म छों तखि मू , जख तू औण क बोलगी थै ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी......✍️
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