सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

औ दें कि अब त ज्याणी कु ज्याणी , बसंत कथगा चली गै ।(गढ़वाली)

 औ दें कि अब त ज्याणी कु ज्याणी , बसंत कथगा चली गै ।


मी जग्वाल म छों तखि मू , जख तू औण क बोलगी थै ।


औ दे कुछ छुई त लगवा यनि कि , जु रस्यांण ऐ ज्याली ।


भिण्डी दिनु कु खुदियूं मन , तेरा बिग़ैर....


जरा औ दें मुलमूल हैंसी जा दें कि ,

 

वरषु बटी कुंद मेरी मुखड़ी , दिखी त्वे हैंसी ज्याली ।


औ दें कुछ छुईं  त लगवा यनि कि , जु रस्यांण ऐ ज्याली ।


औ दें कि अब त ज्याणी कु ज्याणी , बसंत कथगा चली गै ।


मी जग्वाल म छों तखि मू , जख तू औण क बोलगी थै ।


ज्योति प्रसाद रतूड़ी......✍️



टिप्पणियाँ