हमने तो उनकी हर यादें ही , मिटा डाली थी ।
मगर , कम वक्त यह दिल है के ......
उनके तसब्बुर को , आज भी संजोय बैठा है ।
माना कि नही है अब , मलाल हमें कोई ।
उनसे बिछुड़ने का .....
कम वक्त यह आंखें है कि ....
उनको ख्वाबों में , आज भी देखा करती है ।
कह तो गए थे वो हमसे के ,
मुझसे बेहतर हासिल है अब उनको ।
कम वक्त , ना जाने हमें ,
उन पर भरोसा क्यों है इतना के .......
उनकी इस जुबाँ पर हमें यकीन नहीं है ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी.....✍️
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