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उतरा नशा , इश्क का अब ।

 उतरा नशा , इश्क का अब ।

के हाल  बे-हाल , 

सनम वो कर गए ।

शायद ! किसी की,  दुआ का 

असर ही रहा ये ।

 जो साँसों के. ..

काबिल भी ,  तुम  रह गए ।

ज्योति प्रसाद रतूड़ी......✍️

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