ढोल पीटो चाहे नगाड़ा !
ये तो मस्त चाल से ,
चल रहें है , मोदी मेरे भाया !
मोदी मेरे भाया , सुन शाह तुम !
कहाँ सो रहे हो ?
शत्रु- सडयंत्र के ,चक्रव्यूह में तुम !
चाहूँ ओर से , घिर रहे हो ।
उठो जागो नींद से अब तुम,
बहुत हुई स्वप्न देश की सैर सारी ।
खतरे में है देश अब हकीकत में,
कर लो इसे बचाने की तुम तैयारी ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी.....✍️
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