मेहनत और मुकद्दर जब
एक साथ हो तो ही ,
ऐसा संजोग मिल पता है ।
"बुलन्दियों को छूने का"
वरना अपने लिए कमी ,
कौन चाहता है ।
हर इंसान मेहनत करता है ,
कोई आसमान छू जाता है ।
और कोई जमीं पर ही ,
राह जाता है ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी .....✍️
मेहनत और मुकद्दर जब
एक साथ हो तो ही ,
ऐसा संजोग मिल पता है ।
"बुलन्दियों को छूने का"
वरना अपने लिए कमी ,
कौन चाहता है ।
हर इंसान मेहनत करता है ,
कोई आसमान छू जाता है ।
और कोई जमीं पर ही ,
राह जाता है ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी .....✍️
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