शब ए गम , ये तन्हाई का आलम ।
और उस पर , आपका गम ।
कहीं मार न डाले , ये हमें ओ मेरे सनम ।
ऐसे में आ जाओ तुम , ओ मेरे बालम ।।
है सकून तुझसे , मेरी जिंदगी का ,
कहां चैन हमें , तेरे बिन ।
ओ मेरे सनम !
आ जा ओ मेरे बालम वो मेरे सनम ।
ओ मेरे सनम ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी✍️
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